ओसीडी मस्तिष्क के किन हिस्सों को प्रभावित करती है?HealthPlanet

Posted on Thu 15th Dec 2022 : 11:04

क्सपर्ट्स के मुताबिक, ओसीडी का खुद ही इलाज करना मुश्किल होता है, डॉक्टर की सलाह लेना अच्छा तरीका
ओसीडी इंसान की नॉर्मल लाइफ पर काफी असर डालती है, प्रोडक्टिविटी और रिश्तों को प्रभावित करती है

महामारी की शुरुआत के साथ ही हेल्थ एजेंसियां और सरकार संक्रमण से बचने के लिए लोगों को हाथ धोने और सफाई रखने की सलाह दे रही हैं। अब वे लोग भी किसी भी चीज को छूने या किसी से मिलने के तुरंत बाद हैंडवॉश खोजने लगे हैं, जो पहले सिर्फ खाने के समय ही हाथ धोते थे। यह कोरोना के समय में न्यू नॉर्मल हैं, क्योंकि वैक्सीन नहीं आने तक आप ऐसा कर खुद को काफी हद तक बचा सकते हैं। लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए बार-बार हाथ धोने या सफाई बनाए रखने के लिए एक ही चीज को कई बार दोहराना नया नहीं है। ये लोग ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर (ओसीडी) की वजह से बार-बार हाथ धोते हैं।

हालांकि, मेडिकल नजरिए से एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ओसीडी एक गंभीर मानसिक बीमारी है। नेशनल हेल्थ पोर्टल ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रति 100 लोगों में से 2-3 लोगों को पूरे जीवन में ओसीडी होती है। यह बीमारी पुरुषों और महिलाओं को बराबर प्रभावित करती है। एनएचपी के मुताबिक, इस बीमारी की शुरुआत आमतौर पर 20 साल की उम्र में हो जाती है। हालांकि, यह दो साल के बच्चे से लेकर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है।

फोर्टिस हेल्थकेयर में मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेज विभाग की हेड और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर कामना छिब्बर कहती हैं, "ओसीडी एक बीमारी होती है। ये इंसान की नॉर्मल लाइफ को प्रभावित करती है। साथ ही रिलेशनशिप और प्रोडक्टविटी पर असर डालती है। मरीजों को सोच या व्यवहार के स्तर पर काफी तकलीफ होती है। उनके लिए कोई हालात कंफर्टेबल नहीं होते हैं, क्योंकि मन में कई चीजें बार-बार चल रही होती हैं।"

क्या है ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर (OCD)?
डॉक्टर छिब्बर के मुताबिक, "ओसीडी बीमारी में दो कम्पोनेंट्स होते हैं। ऑब्सेशन (सनक) और कंपल्शन (मजबूरी)। ऑब्सेशन में कोई सोच, कोई आइडिया होता है जो इंसान के मन में बार-बार आता है। इस पर कंट्रोल नहीं होता है। कई बार ऑब्सेशन होता है तो व्यवहार में कंपल्शन भी आ जाता है। जैसे- हाथ धोने या क्लीनिंग जैसे कामों से मरीज मन की घबराहट को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं।"

छिब्बर ने बताया कि ओसीडी बायोलॉजिकल और न्यूरोट्रांसमीटर्स का बैलेंस बिगड़ने की वजह से होता है। इसके इलाज में दवाईयों और साइकोथैरेपी का बड़ा रोल होता है। थैरेपी में सीबीटी की तरीके काफी इस्तेमाल किए जाते हैं।

ऑब्सेशन और कंपल्शन का मतलब जानिए
इंटरनेशनल ओसीडी फाउंडेशन के मुताबिक, ऑब्सेशन ऐसे विचार, इमेज होते हैं जो व्यक्ति को बार-बार नजर आते हैं। वे इसपर अपना नियंत्रण नहीं रख पाते हैं। ओसीडी से जूझ रहे लोग इन विचारों को लाना नहीं चाहते और उनके लिए यह काफी परेशान करने वाले होते हैं। कई मामलों में लोग जानते हैं कि इन विचारों का कोई मतलब नहीं है। आमतौर पर ऑब्सेशन गंभीर और असहज करने वाली एहसास जैसे- डर, संदेह या असंतोष के साथ होता है।

ओसीडी के दौरान नजर आने वाले कुछ आम ऑब्सेशन

गंदगी: इसमें व्यक्ति एचआईवी जैसी बीमारियों से डरता है या उसे एनवायरमेंट को खराब करने वाली चीजें, जैसे- रेडिएशन और घर में मौजूद कैमिकल्स और धूल को लेकर चिंता बनी रहती है।
नियंत्रण खोना: खुद को या किसी दूसरे व्यक्ति को चोट पहुंचाना, चोरी और हिंसा का डर जैसी चीजें शामिल होती हैं।
नुकसान: व्यक्ति को डर बना रहता है कि वो चोरी या आगजनी जैसी किसी गंभीर घटना का जिम्मेदार है या उसकी लापरवाही के कारण किसी और को नुकसान पहुंचा है।
पर्फेक्शन से जुड़े ऑब्सेशन्स: किसी भी चीज को पूरी या सही तरीके से करने की चिंता या कुछ याद रखने की चिंता रहती है। किसी भी चीज को फेकते वक्त जरूरी जानकारी के बारे में भूल जाने का डर रहता है। चीजों को फेकने या रखने को लेकर फैसला नहीं कर पाते हैं या किसी भी चीज को खोने का डर।
दूसरे ऑब्सेशन्स: किसी भी गंभीर बीमारी की चपेट में आने का डर बना रहता है। इसके अलावा लकी या अनलकी नंबर और रंगों लेकर अंधविश्वास वाले आइडिया आते हैं।

कंपल्शन
ये कुछ ऐसे व्यवहार होते हैं जहां व्यक्ति अपने ऑब्सेशन को खत्म करने के प्रयास करता है। ओसीडी से जूझ रहे लोगों को यह पता होता है कि यह केवल अस्थाई उपाय है, लेकिन इससे बचने का सही तरीका खोजने के बजाए वे कंपल्शन पर निर्भर रहते हैं।

ओसीडी के दौरान नजर आने वाले कुछ आम कंपल्शन

धुलाई और सफाई: इसमें एक ही तरीके से बार-बार हाथों को धोना, हद से ज्यादा देर तक नहाना, दांत साफ करना या सफाई से जुड़ी चीजों को करते रहना शामिल है।
चैकिंग: यह जानने के लिए कि आप खुद को या किसी और को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे। बार-बार किसी चीज की जांच करना। यह पता करते रहना कि कुछ बुरा तो नहीं हुआ या आपसे कोई गलती तो नहीं हुई। शरीर के कुछ हिस्सों को बार-बार चैक करना।
दोहराना: बार-बार किसी चीज को पढ़ना-लिखना या किसी भी बॉडी मूवमेंट्स को दोहराते रहना।

OCD के क्या सिम्पटम्स होते हैं?

किसी भी चीज को बार-बार दोहराना, मूड पर असर पड़ना, प्रोडक्टिविटी कम होना। डॉ. छिब्बर ने बताया कि अगर किसी भी इंसान को मेंटल हेल्थ बीमारी है तो वह काफी तनाव में नजर आएगा। ओसीडी से जूझ रहे व्यक्ति को डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

OCD से कैसे उबर सकते हैं?

अगर आपको लक्षण नजर आ रहे हैं तो, सबसे पहले हेल्थ को मॉनिटर करें। साइकेट्रिस्ट या थैरेपिस्ट जैसे एक्सपर्ट्स की सलाह लें। क्योंकि, आपके विचार या व्यवहार को जानने के तरीके सीखने की जरूरत है। यह तरीके आपको एक्सपर्ट्स बता सकते हैं, क्योंकि वे आपकी स्थिति को देखकर उपाय तैयार करेंगे, ताकि आप असहज न हों।
अगर आप अपने स्तर पर इस बीमारी पर काम करना चाहते हैं तो ऐसी छोटी सोच जो आपको तकलीफ न दें, उन्हें नजरअंदाज करें। व्यवहार में बदलाव लाने पर चिंता कम करें। बार-बार आ रहे विचारों से बचने की कोशिश करें और खुद को टेस्ट करें कि क्या आप ऐसा कर पा रहे हैं या नहीं। धीरे-धीरे इसका स्तर बढ़ाएं।
इसे खुद ट्रीट करना मुश्किल होता है। क्योंकि, यह एक बीमारी है और यह डर, भय और घबराहट की वजह बनती है। ऐसे में एक्सपर्ट्स से बात करना जरूरी है। लक्षण नजर आ रहे हैं तो परिवार या दोस्तों से इसके बारे में बात करें। इसमें फैमिली सपोर्ट बहुत जरूरी होता है।

कोविड 19 और OCD

कोरोनावायरस के कारण हो सकता है कि कई लोगों के ओसीडी लक्षण प्रभावित हुए हों। डॉक्टर छिब्बर भी कहती हैं कि किसी भी तरह का तनाव बीमारी के असर को बढ़ाता है। अगर आप इसकी तुलना कोविड-19 के दौरान सफाई से करेंगे तो यह अलग है। क्योंकि, हमारे दिमाग में यह बात बार-बार नहीं चलती है। इसके कारण हमारी लाइफ, रिलेशन पर असर नहीं पड़ता है। यह सबसे बड़ा फर्क है। आईओसीडीएफ के इन टिप्स को फॉलो कर अपने आप को शांत कर सकते हैं।

अगर आप गंदगी से जुड़े डर से जूझ रहे हैं तो...

बेसिक सेफ्टी प्लान तैयार करने के लिए खुद को तैयार करें। ध्यान रखें कि इसमें अपने हिसाब से चीजों को शामिल न करें। सतहों को दिन में एक बार साफ करें और बार-बार छूने में आ रही सतहों पर फोकस करें। पहले सोच लें कि क्या वाकई यह जरूरी है। यह प्रक्रिया हर रोज कुछ मिनटों में पूरी हो सकती है।
बाथरूम के उपयोग के बाद, बाहर से आने के बाद, खाने से पहले और खांसी या छींकने के बाद हाथों को साबुन और पानी से 20 सैकेंड तक धोएं। अगर आपके पास हैंडवॉश नहीं है तो, कम से कम 60 प्रतिशत एल्कोहॉल वाले हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें।

अगर आप परफेक्शन से जुड़े ऑब्सेशन से जूझ रहे हैं तो...

खुद को यह याद दिलाएं कि कोई भी खुद को कोविड-19 से पूरी तरह नहीं बचा सकता है और कोई आपसे इसकी उम्मीद भी नहीं कर रहा है। इस तरह के हालात में परफेक्शन पाने के बजाए कॉमन सेंस का इस्तेमाल करें।
याद रखें कि हेल्थ ऑर्गेनाइजेशंस ने गाइडलाइंस बनाते वक्त ओसीडी से जूझ रहे लोगों के बारे में नहीं सोचा है। ऐसे में अपने भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य या थैरेपिस्ट की मदद लेना मददगार हो सकता है। साथ ही इन गाइडलाइंस के तरीकों को मानने में थैरेपिस्ट आपकी मदद कर सकता है।

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